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Tuesday, 2 August 2016

Life changing story#2 'No one can go back'


 इस कहानी पर ध्यान दें 

एक गिलहरी रोज अपने काम पर समय से आती थी और अपना काम पूर्ण मेहनत तथा ईमानदारी से करती थी ! गिलहरी जरुरत से ज्यादा काम कर केभी खूब खुश थी क्यों कि उसके मालिक जंगल के राजा शेर नें उसे दस बोरी अखरोट देने का वादा कर रक्खा था !

गिलहरी काम करते करते थक जाती थी तो सोचती थी कि थोडी आराम कर लूँ , वैसे ही उसे याद आता था कि शेर उसे दस बोरी अखरोट देगा - गिलहरी फिर काम पर लग जाती !


गिलहरी जब दूसरे गिलहरीयों को खेलते - कुदते देखती थी तो उसकी भी ईच्छा होती थी कि मैं भी enjoy करूँ ! पर उसे अखरोट याद आ जाता था ! और वो फिर काम पर लग जाती !

शेर कभी - कभी उसे दूसरे शेर के पास भी काम करने के लिये भेज देता था ! ऐसा नहीं कि शेर उसे अखरोट नहीं देना चाहता था , शेर बहुत ईमानदार था ! ऐसे ही समय बीतता रहा....

एक दिन ऐसा भी आया जब जंगल के राजा शेर ने गिलहरी को दस बोरी अखरोट
दे कर आजाद कर दिया ! 

गिलहरी अखरोट के पास बैठ कर सोचने लगी कि:-अब अखरोट हमारे किस काम के ? पुरी जिन्दगी काम करते - करते दाँत तो घिस गये, इसे खाऊँगी कैसे !
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दोस्तों यह कहानी आज जीवन की हकीकत बन चुकी है ! इन्सान अपनी ईच्छाओं का त्याग करता है, और पुरी जिन्दगी नौकरी में बिता देता है ! 

60 वर्ष की ऊम्र जब वो रिटायर्ड होता है तो उसे उसका फन्ड मिलता है ! तब तक जनरेसन बदल चुकी होती है, परिवार को चलाने वाला मुखिया बदल जाता है । क्या नये मुखिया को इस बात का अन्दाजा लग पयेगा की इस फन्ड के लिये : -

कितनी इच्छायें मरी होगी ?
कितनी तकलीफें मिलि होगी ?
कितनें सपनें रहे होंगे ?

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दोस्तों क्या फायदा ऐसे फन्ड का जिसे पाने के लिये पूरी जिन्दगी लगाई जाय और उसका इस्तेमाल खुद न कर सके ! "इस धरती पर कोई ऐसा आमीर अभी तक पैदा नहीं हुआ जो बिते हुए समय को खरीद सके ।

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